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मोतिहारी जहरीली शराब कांड: नोएडा से आई इंडस्ट्रियल स्पिरिट से मौत का खेल, 10 लोगों की जान गई

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मोतिहारी जहरीली शराब कांड में बड़ा खुलासा—नोएडा से मंगाई गई औद्योगिक स्पिरिट से बनाई गई शराब, 10 मौतें, कई आरोपी गिरफ्तार, जांच तेज।

मोतिहारी/आलम की खबर: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में हुए जहरीली शराब कांड ने एक बार फिर राज्य में प्रतिबंध के बावजूद फल-फूल रहे अवैध शराब नेटवर्क की भयावह तस्वीर सामने ला दी है। इस घटना में अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोग गंभीर हालत में अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। ताजा जांच में जो खुलासे हुए हैं, वे न सिर्फ चौंकाने वाले हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि अवैध शराब का यह कारोबार कितनी संगठित और खतरनाक तरीके से चल रहा है।

जांच एजेंसियों ने इस मामले में जो सबसे अहम तथ्य उजागर किया है, वह यह है कि जहरीली शराब बनाने में जिस रसायन का इस्तेमाल किया गया, वह सामान्य शराब बनाने वाला पदार्थ नहीं, बल्कि औद्योगिक उपयोग के लिए लाई गई स्पिरिट थी। यह स्पिरिट उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र Noida से मंगाई गई थी। इससे यह साफ हो गया है कि इस पूरे कांड के तार राज्य की सीमाओं से बाहर तक जुड़े हुए हैं और इसमें एक संगठित सप्लाई चेन काम कर रही थी।

जार पर लिखे नाम से खुला राज

जांच के दौरान जब पुलिस और मद्य निषेध विभाग ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों में छापेमारी की, तो उन्हें बड़ी संख्या में ऐसे प्लास्टिक जार मिले जिन पर ‘सुपर पावर AW-68 हाइड्रोलिक ऑयल’ लिखा हुआ था। शुरुआत में इन जारों को सामान्य औद्योगिक कंटेनर माना गया, लेकिन जब उनकी जांच की गई तो पता चला कि इन्हीं में खतरनाक रसायन भरकर लाया गया था, जिसका उपयोग बाद में जहरीली शराब तैयार करने में किया गया।

अब तक 26 लीटर क्षमता वाले 50 से अधिक जार बरामद किए जा चुके हैं, जो इस बात का प्रमाण हैं कि यह कोई छोटा-मोटा धंधा नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर संचालित नेटवर्क था। इन जारों के जरिए लाई गई स्पिरिट को स्थानीय स्तर पर मिलावट कर शराब के रूप में बेचा गया, जिससे इतनी बड़ी त्रासदी हुई।

आरोपियों की भूमिका और साजिश का खुलासा

इस मामले में पुलिस ने कई आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया है, जबकि कुछ ने आत्मसमर्पण भी किया है। जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी राजा कुमार ने कन्हैया राय के साथ मिलकर इस स्पिरिट की व्यवस्था की थी। दोनों स्थानीय स्तर पर सप्लाई चेन को संचालित कर रहे थे और उनके बीच पैसों के लेन-देन के भी ठोस साक्ष्य मिले हैं।

वहीं, एक अन्य आरोपी सुनील साह, जिसने बाद में आत्मसमर्पण किया, उसकी भूमिका भी बेहद अहम पाई गई है। पुलिस अब इन सभी आरोपियों के मोबाइल फोन का तकनीकी विश्लेषण कर रही है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे और किस स्तर तक इसकी पहुंच थी।

इसके साथ ही, पुलिस पिछले एक साल का मूवमेंट चार्ट भी तैयार कर रही है, ताकि यह समझा जा सके कि यह गिरोह कब से सक्रिय था और किन-किन इलाकों में इसका नेटवर्क फैला हुआ था।

जांच में तकनीकी और कानूनी सख्ती

घटना के बाद राज्य के मद्यनिषेध एवं स्वापक नियंत्रण तंत्र ने जांच को और मजबूत बनाने के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें घटनास्थल से जब्त किए गए सभी साक्ष्यों की ‘चेन ऑफ कस्टडी’ को सही तरीके से मेंटेन करने पर जोर दिया गया है, ताकि अदालत में केस के दौरान कोई तकनीकी खामी न रह जाए।

साथ ही, मालखाने में रखे गए साक्ष्यों की एंट्री और उनके रख-रखाव को लेकर भी सख्त निर्देश दिए गए हैं। हर साक्ष्य की आवाजाही को रजिस्टर में दर्ज करना अनिवार्य किया गया है, जिससे जांच की पारदर्शिता बनी रहे।

पहले से जारी थे निर्देश, फिर भी नहीं रुका खेल

गौर करने वाली बात यह है कि इससे पहले भी बिहार पुलिस ने जहरीली शराब की घटनाओं को लेकर एक विस्तृत एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) जारी किया था। इसमें सभी जिलों को सतर्क रहने, खुफिया जानकारी जुटाने और स्थानीय स्तर पर चौकीदारों व दफादारों को सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए थे।

इसके बावजूद मोतिहारी में इतनी बड़ी घटना हो जाना कई सवाल खड़े करता है। क्या स्थानीय स्तर पर निगरानी में कमी थी? या फिर यह नेटवर्क इतना मजबूत हो चुका है कि वह सिस्टम को चकमा देने में सफल रहा?

मेथेनॉल: मौत का अदृश्य जहर

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं में जिस रसायन का इस्तेमाल होता है, वह आमतौर पर मेथेनॉल होता है, जिसे मिथाइल अल्कोहल भी कहा जाता है। यह एक अत्यंत जहरीला पदार्थ है, जिसका उपयोग औद्योगिक कामों में किया जाता है, न कि पीने योग्य शराब में।

मेथेनॉल शरीर में पहुंचते ही तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचाता है और थोड़ी मात्रा में भी यह जानलेवा साबित हो सकता है। इसके सेवन से अंधापन, अंगों का फेल होना और अंततः मौत तक हो सकती है। यही वजह है कि अवैध शराब बनाने में इसका इस्तेमाल बेहद खतरनाक माना जाता है।

बाहरी राज्यों से हो रही सप्लाई

बिहार में मेथेनॉल या इस तरह की औद्योगिक स्पिरिट का उत्पादन नहीं होता है, इसलिए इसे दूसरे राज्यों से मंगाया जाता है। यही वजह है कि इस पूरे मामले में Bihar से बाहर तक जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। नोएडा से आई स्पिरिट ने यह साफ कर दिया है कि यह एक इंटर-स्टेट नेटवर्क है, जिसमें कई स्तरों पर लोग शामिल हो सकते हैं।

बड़ा सवाल: कब रुकेगा मौत का यह सिलसिला?

मोतिहारी की यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि शराबबंदी के बावजूद आखिर अवैध शराब का कारोबार कैसे फल-फूल रहा है। हर बार घटना के बाद कार्रवाई होती है, लेकिन कुछ समय बाद फिर वैसी ही घटनाएं सामने आ जाती हैं।

कुल मिलाकर, यह मामला सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क, प्रशासनिक चुनौतियों और सामाजिक जोखिम का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस मामले में कितनी गहराई तक जांच पहुंचती है और क्या दोषियों को सख्त सजा मिल पाती है या नहीं।

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